(गुजरात) जैन धर्म का सबसे शाश्वत और सर्वोच्च तीर्थ माना जाता है। जैन मान्यता के अनुसार, इस पवित्र पर्वत पर अनंत आत्माओं ने मोक्ष प्राप्त किया है। पालिताना की भावपूर्ण यात्रा को पूर्ण करने और वहां की पावन ऊर्जा को आत्मसात करने के लिए 5 मुख्य स्थानों पर चैत्यवंदन (पाँच चैत्यवंदन) करने का विधान है।
रायण पगलिये और अन्य स्थानों पर प्रभु के चरणों में साष्टांग प्रणाम करते हुए अपनी आत्मा के उद्धार की प्रार्थना करें。
मुख्य जिनालय (Main Temple), गर्भगृह। हिंदी पाठ:
जैन धर्म के सबसे पवित्र महातीर्थ शत्रुंजय गिरिराज (पालीताना) की भावपूर्ण यात्रा का मुख्य आधार हैं । जैन श्वेतांबर परंपरा में, जब कोई आराधक पालीताना की नवकारसी या 99 यात्रा करता है, तो मुख्य 5 स्थानों पर प्रभु की स्तुति और वंदन करना अनिवार्य माना जाता है। यह चैत्यवंदन आत्मा के कर्मों को क्षय कर मोक्ष मार्ग को प्रशस्त करता है。 palitana 5 chaityavandan in hindi full
भाव धरीने जे चढे, तेने भवपार उतारे।
शांतिनाथ भगवान 16वें तीर्थंकर हैं। उन्हें "मृग लांछन" और "कंचन वर्णी काया" वाला बताया गया है।
म्हारो मुजरो ल्यो ने राज, साहेब शांति सलोणा;दुःख कापो ने सुख आपो, जिनवर करुणा के कोणा। साहेब शांति सलोणा
माना जाता है कि भगवान आदिनाथ इसी वृक्ष के नीचे ध्यानमग्न हुए थे।
इस पवित्र रायण वृक्ष को देखो, जहाँ स्वयं आदिनाथ भगवान का निवास रहा है। इस वृक्ष के नीचे प्रभु के जो पावन चरण कमल (पादुका) हैं, वे भक्तों के मन की सभी आत्मिक इच्छाओं को पूरा करते हैं। इसी स्थान पर कभी देवराज इंद्र ने प्रभु का समवसरण रचा था। इस वृक्ष की छाया और प्रभु के चरणों का ध्यान करने से जीव का जन्म-मरण का चक्र सदा के लिए मिट जाता है।
यह आदिनाथ भगवान के प्राचीन चरण पादुका (रायण वृक्ष के नीचे) के पास किया जाता है। दुःख कापो ने सुख आपो
2. श्री शांतिनाथ भगवान (Shri Shantinath Bhagwan)
यह वंदन मन की शांति और भक्ति भाव को बढ़ाने के लिए किया जाता है।
- प्रथम चैत्यवंदन
1. प्रथम चैत्यवंदन: मुख्य जिनालय (The Main Temple)